मैं निर्धन लाचार बाला जी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैं निर्धन लाचार बाला जी क्यूकर तुम्हे मनाऊ,

खुला लाटरी मेरी भी मैं दर पे तेरे आउ,

मैं निर्धन लाचार बालाजी..

बड़े बड़े धनवान यो तेरे छप्पन भोग लगावे,

मेरे घर रोटी का टोटा माल कड़े ते आवे,

मुश्किल से मैं करू गुजारा साँची बात बताऊ,

खुला लाटरी मेरी भी मैं दर पे तेरे आउ,

मैं निर्धन लाचार बालाजी..

जयदा न चाहु पर बाबा इतना दे दे मने,

चले गुजारा ज़िंदगी का और याद रखु बस तने,

कद की जी मैं यारी तेरे छप्पन भोग लगाउ,

खुला लाटरी मेरी भी मैं दर पे तेरे आउ,

मैं निर्धन लाचार बालाजी..

घने साल हो गए बाबा और करे ना देरी,

खोल दे ताला बाबा इब तू बंद किस्मत की मेरी,

आनंद तू न सुने तो और बता किसे मैं सुनाऊ,

खुला लाटरी मेरी भी मैं दर पे तेरे आउ,

मैं निर्धन लाचार बालाजी..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।