जय कात्यायनी माँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नवरात्रि का छठा है यह माँ कात्यायनी रूप।

कलयुग में शक्ति बनी दुर्गा मोक्ष स्वरूप॥

कात्यायन ऋषि पे किया माँ ऐसा उपकार।

पुत्री बनकर आ गयी, शक्ति अनोखी धार॥

देवों की रक्षा करी, लिया तभी अवतार।

बृज मंडल में हो रही आपकी जय जय कार॥

गोपी ग्वाले आराधा था जब जब हुए उदास।

मन की बात सुनाने को आए आपके पास॥

श्री कृष्णा ने भी जपा अम्बे आपका नाम।

दया दृष्टि मुझपर करो बारम्बार प्रणाम॥

नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ।

नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ॥

जय कात्यायनी माँ।

जय जय कात्यायनी माँ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।