जय माँ सकंदा माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवरात्रि के पांचवी स्कन्दा माता माहारानी।

इसका ममता रूप है ध्याए ग्यानी ध्यानी॥

कार्तिक्ये को गोद ले करती अनोखा प्यार।

अपनी शक्ति दी उसे करे रकत संचार॥

भूरे सिंह पे बैठ कर मंद मंद मुस्काए।

कमल का आसन साथ में उसपर लिया सजाए॥

आशीर्वाद दे हाथ से, मन में भरे उमंग।

कीर्तन करता आपका छाडे नाम का रंग॥

जैसे रूठे बालक की सुनती आप पुकार।

मुझको भी वो प्यार दो मत करना इनकार॥

नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ।

नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ॥

जय माँ सकंदा माता।

जय माँ सकंदा माता॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।