नर कपट खटाई त्याग

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॥ पावन पाठ ॥

नर कपट खटाई त्याग करा कर काम भलाई के,

तेरा होजा गा कल्याण भजन कर ले रघुराई के,

भले करम कर्म की राही भाई सबसे सच्चा प्यारा बोल,

चुगली निन्दा छोड़ पराई बोल कभी तोल बोल,

मिठ्ठी बोली मोहनी मन्त्र प्रेम का खजाना खोल,

तेरा सोता जागे भाग बोल तु बोल कमाई केे,

तेरा होजा......

दुजा मन्त्र पढ मेरे मित्र दुश्मन को भी करदे माफ,

दगा ना भरेब राखे बाहर भितर करले साफ,

छमा का हथियार पुरा बेरी मरजा अपने आप,

गांधी जी की ढाल जितले जंग लडाई के,

तेरा होजा.....

तीसरा है काम तेरा इन्द्रियों का दमन कर,

ग्यान की कटार मार मन पापी को बस मे कर,

परमेश्वर की हस्ती मान उस मालिक का सुमरण कर,

तु बन काग से हंस चेतजा जन्म सभाई के,

तेरा होजा...

आखरी है काम तेरा चेतन का प्रकाश देख ,

ओम सोम बोल रही घट के अन्दर श्वास देख,

गुरु वेदव्यास तेरा कर के ना अभ्यास देख,

साधु राम बेराग जानजा छंद कविताई का,

तेरा होजा..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।