खाटू वाले श्याम ये कैसी माया है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू वाले श्याम ये कैसी माया है,

या लीला धरी ने खेल रचाया है,

पुत्र हो या पौत्र भीम के श्याम धनि,

भाव के आगे शाश्त्र समज न आया है,

मेरा तो दिलदार यार है ये खाटू वाला,

कहो मोर विनन्दन है एहलवती का लाला

प्यार के छिलके है जितना छील लिए,

भेद इस में कुछ भी नजर न आया है,

खाटू वाले श्याम ये कैसी माया है,

श्याम दीवानो भगतो को यु न भरमाओ,

खुद के नाम के लिए श्याम का नाम न लाओ,

वशुदेव नन्द लाल में जब फर्क नहीं फर्क अपने फिर क्यों बताया है,

खाटू वाले श्याम ये कैसी माया है,

भाव के पत्थर ही रामणिक है कहलाते,

बिना भाव के पत्थर भाव से है पूजे जाते,

क्या मिले गा भावना से खेल के,

मनु श्याम ये एक समज में आया है,

खाटू वाले श्याम ये कैसी माया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।