अमर आत्मा सच्चिदानद मैं हूँ

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अमर आत्मा सच्चिदानद मैं हूँ,

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं।

अखिल विश्व का जो परमात्मा है,

सभी प्राणियो का वो ही आत्मा है,

वही आत्मा सचिदानंद मैं हूँ।

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं॥

जिसे शस्त्र ना काटे ना अग्नि जलावे,

गलावे ना पानी, ना मृत्यु मिटावे,

वही आत्मा सचिदानंद मैं हूँ।

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं॥

अजर और अमर जिसको वेदों ने गाया,

यही ज्ञान अर्जुन को हरी ने सुनाया,

वही आत्मा सचिदानंद मैं हूँ।

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं॥

अमर आत्मा है, मरण शील काया,

सभी प्राणियो के भीतर जो समाया,

वही आत्मा सचिदानंद मैं हूँ।

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं॥

है तारो सितारों में प्रकाश जिसका,

जो चाँद और सूरज में आभास जिसका,

वही आत्मा सचिदानंद मैं हूँ।

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं॥

जो व्यापक है जन जन में है वास जिसका,

नहीं तीन कालो में हो नाश जिसका,

वही आत्मा सचिदानंद मैं हूँ,

शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।