अजब तेरी कारीगरी रे करतार

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॥ पावन पाठ ॥

किस विधि करे बखान प्रभु, तेरे कोटि कोटि उपकार।

कल तक थी खाली झोली, और आज भरे भण्डार।

अजब तेरी कारीगरी रे करतार,

समझ ना आए माया तेरी, बदले रंग हज़ार।

देने वाले तूने यह घर खुशीओं से भर डाला,

तेरी दया ने पल में दाता क्या से क्या कर डाला।

तू सब से बड़ा है दानी, तेरी लीला किस ने जानी,

जग सोच सोच गया हार, अजब तेरी कारीगरी रे करतार॥

छोटा सा संसार हमारा स्वर्ग बनाए रखना,

इस बगिया में सदा ख़ुशी के फूल खिलाए रखना।

चाहे राजा हो या भिखारी, तूने विपदा सब की टारी,

अरे वाह रे पालन हार, अजब तेरी कारीगरी रे करतार॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।