दूर है न ये किनारा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दूर है न ये किनारा मेरे श्याम,

दूर है न ये किनारा ना समज आये मेरी,

नाव डूबे गी मेरी भावना है क्यों मेरी,

मेरे श्याम मेरे श्याम मेरे श्याम,

मन वचन और कर्म से भाव उज्जवल हो मेरे,

धर्म का निर्माण हो पाप का विनाश हो,

क्यों चलु न उसकी पथ पे जिसका कोई पथ नहीं,

नाव डूबे गी मेरी भावना है क्यों मेरी....

मैं भटक ता जा रहा हु मेरे श्याम,

इस भवर के जाल में मुझको लेकर जाएगा जब सवाली अपने साथ में,

क्यों न समजा मैं उसे जो रहता है संग में मेरी,

नाव डूबे गी मेरी भावना है क्यों मेरी,

मेरे संग जो भी चले थे अब वो मेरे संग नहीं,

ज़िंदगी के रंग है भवरे अब वो पहले रंग नहीं,

क्यों न रंग लू उसके रंग में,

जिसका कोई रंग नहीं,

नाव डूबे गी मेरी भावना है क्यों मेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।