आसरा एक तेरा एक तेरा सहारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आसरा एक तेरा एक तेरा सहारा,

सुनले फरियाद मेरी आ मुझे दे किनारा,

आसरा ऐक तेरा एक तेरा सहारा.

जख्मी जग ने किया है घाव किसको दिखाऊ,

कोई अपना नही है हाल किसको सुनाऊ,

एक तुझपे ही] मैया जोर चलता है मेरा,

आसरा ऐक तेरा एक तेरा सहारा.

आंधिया चल रही है रात भी है तूफानी,

बड़ा गहरा भंवर है और कश्ती पुरानी,

आज मजबूर होके मेने तुझको पुकारा,

आसरा ऐक तेरा एक तेरा सहारा

दर्द दिल में भरा है हर्ष तू बाट लेना,

भेंट ये अवगुणों की आज स्वीकार लेना,

मिट करके बुराई तूने कितनो को तारा,

आसरा ऐक तेरा एक तेरा सहारा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।