में जानू मेरा साईं जाने

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॥ पावन पाठ ॥

ओ बेखबर तुझे क्या पता मेरे साई ने मुझे क्या दिया,

मैं जानू मेरा साई जाने,

साई ने दी है मुझको ऐसी निशानी,

दुनिया ये कहती है मुझको दीवानी,

मेरा तो सब साई है,

दुनिया से क्या मुझे वास्ता,

मैं जानू मेरा साईं जाने,

सोइ थी किस्मत मेरी तुमने जगा दी,

साई ने देखो मेरी बिगड़ी बना दी,

हैरान है सब देख कर ये क्या हुआ कैसे हुआ,

मैं जानू मेरा साई जाने,

साई ने जब भी मुझको शिरडी भुलाया,

दुनिया की मुश्किलों से मैं जा न पाया,

इस से क्या मतलब तुम्हे वो दे मुझे जो भी सजा,

मैं जानू मेरा साई जाने,...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।