तुम हमारी थी मईया जी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तुम हमारी थी मईया जी, तुम हमारी हो,

तुम हमारी ही रहोगी, माँ मेरी अम्बे ll

हम तुम्हारे थे मईया जी, हम तुम्हारे है,

हम तुम्हारे ही रहेंगे, माँ मेरी अम्बे

तुम हमारी थी मईया जी,,,,,,,,,,,,,

तुम्हे छोड़ कर, मईया प्यारी, कोई न मीत हमारा ll

किसके द्वार पे, जाएँ पुकारूँ, और न कोई सहारा

अब तो आ कर, बाँह पकड़ लो, माँ मेरी अम्बे

तुम हमारी थी मईया जी,,,,,,,,,,,,

तुमरे कारण, सब जग छोड़ा, तुम संग नाता जोड़ा ll

एक वार माँ, हँस कर कह दो, तूँ मेरी मैं तेरा

साँची प्रीत की, रीत निभा दो, माँ मेरी अम्बे

तुम हमारी थी मईया जी,,,,,,,,,,,,

दास की यह, बिनती सुन लीजे, ओ मेरी मईया प्यारी ll

आखिरी आस, यही जीवन की, पूर्ण करना हमारी

एक वार, ह्रदय से लगा लो, माँ मेरी अम्बे

तुम हमारी थी मईया जी,,,,,,,,,,,,

अपलोड कर्ता- अनिल भोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।