हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता,

आये जो दर पे तेरे,

मन की मुरादे पाते,

हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता,

वृन्दावन वास तेरा सारी दुनिया तुझको जाने,

ब्रह्माण्ड के हो नायक श्री राधे के दीवाने,

नन्द बाबा है तिहारे यशोमत है तेरी माता,

हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता,

कजरा रे तेरे नैना घ्याल करे सब को,

तेरी ये टेढ़ी चितवन पागल करे है मन को,

सावन ये रूप तेरा मन को है मेरे भाता,

हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता,

श्यामा श्याम को जपु मैं ब्रज भूमि में आके,

हर सांस मेरी अर्पण करदु मेरी बांके,

अपना ये सारा जीवन अर्पित करू विधाता,

हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता,

ये नरेश दास तेरा तेरी किरपा पे निर्भर,

जब संग पिया प्रीतम किस बात का हमे दर,

पारस ये तेरा पागल गन गान तेरा गाता,

हरिदास के बिहारी तुमसे न कोई दाता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।