अगर तुम ना होते

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हमें और जीने की चाहत न होती

अगर तुम न होते, अगर तुम न होते

तुम्हें देखके तो लगता है ऐसे

बहारों का मौसम आया हो जैसे

दिखाई न देती अंधेरों में ज्योती

अगर तुम न होते...

हमें जो तुम्हारा सहारा न मिलता

भंवर में ही रहते किनारा न मिलता

किनारे पे भी तो लहर आ डुबोती

अगर तुम न होते...

तुम्हें क्या बताऊं के तुम मेरे क्या हो

मेरी ज़िंदगी का तुम ही आसरा हो

इन आँखों के आँसू, न कहलाते मोती

अगर तुम न होते...

हर इक ग़म तुम्हारा सहेंगे खुशी से

करेंगे न शिकवा कभी भी किसी से

जहां मुझपे हंसता, खुशी मुझपे रोती

अगर तुम न होते..

हमें और जीने की चाहत न होती

अगर तुम न होते, अगर तुम न होते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।