दर जो तेरा है पाया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर जो तेरा है पाया तो किस्मत खुल उठी है,

ववर में मेरी नैया अब तो रूकती नहीं है,

दर जो तेरा है पाया तो किस्मत खुल उठी है,

भटकता था मैं दर दर न कोई था हमारा,

मिला मुझको तू ऐसे जैसे तिनके को सहारा,

हाथ पकड़ के तूने दया ही दया करि है,

ववर में मेरी नैया अब तो रूकती नहीं है,

दर जो तेरा है पाया तो किस्मत खुल उठी है,

बड़ी बंजर थी किस्मत फूलो का न ठिकाना,

मैं था इक ऐसा राही जो था रास्तो से बेगाना,

तूने बगियाँ महकाई राह अब दिख गई है,

ववर में मेरी नैया अब तो रूकती नहीं है,

दर जो तेरा है पाया तो किस्मत खुल उठी है,

सुना कलिकाल में बस तुम्ही हो पालनहारा,

प्रमोद का ओ बाबा तुम्ही से चले गुजारा,

अक्षित को अब सही में ये जो ज़िंदगी मिली है,

ववर में मेरी नैया अब तो रूकती नहीं है,

दर जो तेरा है पाया तो किस्मत खुल उठी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।