कभी मेरे दिल में झाको साईं आके

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॥ पावन पाठ ॥

कभी मेरे दिल में झाको साईं आके,

दुखो पे मरहम लगाओ साईं,

भुलाओ भूलो को मेरी लेकिन,

मुझे न तुम यु भुलाओ साईं,

कभी मेरे दिल में झाको साईं आके...

आस तुम्ही हो तुम्ही भरोसा,

साथ हो तुम तो मुझे फिकर क्या,

जगा के आशा का दीप मुझमे,

हवाओ से भी बचाओ साईं,

कभी मेरे दिल में झाको साईं आके

टूट न जाऊ भिखर न जाऊ,

कब तक खुद को धीर बंदाहू,

नही सहा जाता और मुझसे मुझे न यु अजमो साईं,

कभी मेरे दिल में झाको साईं आके...

नाम तुम्हारा लेकर साहिल धुब रहा पल पल ये दिल,

करो निगाहे कर्म ओ दाता,

नसीब सोया जगाओ साईं

कभी मेरे दिल में झाको साईं आके

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।