साईं तेरा दरबार रहे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन साईं भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी जुबा में इतना असर दे होठो पे तेरा नाम रहे,

हम रहे और या न रहे साईं तेरा दरबार रहे,

नाम रहे तेरा नाम रहे नाम रहे सुबहो श्याम रहे,

साईं दरबार का क्या कहना,

साईं के प्यार का क्या कहना,

तेरा उपकार का क्या कहना,

तेरे दीदार का क्या कहना,

तेरे चरणों में है मुझे रहना,

तेरे भक्तो का है यही कहना,

भूल जाना नही हमे साईं,

मुझे जाना नही कही साईं,

तेरे चरणों में आया दीवाना है,

उम्र भर मुज्झ्को रिश्ता निभाना है,

साईंयां साईंयां मेरे...

हम रहे या न रहे ....

ढोल ताशे भजे तोरे अंगना में,

और संगंत सजे तोरे अंगना में,

पालकी का नजारा क्या कहना,

साईं तेरा दुआरा क्या कहना,

तेरी रोनक निराली हे साईं,

सारी दुनिया सवाली हे साईं,

न किसी को भी ख़ाली लोटना,

तुम्हे जब भी पुकारे आ जाना,

मेरी बिनती में इतना असर देदे,

साईं देखू तुझे वोह नज़र देदे,

साईंयां साईंयां मेरे...

हम रहे या न रहे ....

साईं की हर अदा बड़ी सादी है ,

नीम के निचे पहली समाधि है,

जिसने भी उनको दिल से सदा दी है,

साईं ने उसकी बिगड़ी बना दी है,

पालकी में बजा बेंड बाजा है,

साईं शिरडी नगरियाँ का राजा है,

फूल कलियाँ सजी है शिर्डी में,

रोशनी हो रही है शिरडी में,

सूफी हमसर भी दर पे आया,साईं बाबा ने मुझको भुलाया है.

साईंयां साईंयां मेरे...

हम रहे या न रहे ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।