सहनु अपने ही रंग विच रंग दे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सहनु अपने ही रंग विच रंग दे,

रंग दे ओ सावरिया रंग ओ सावरिया,

तेरिया रंगा दे विच जग सारा रंगिया,

ओ रंग दिता जेहड़ा रंग किथे मंगिया,

मोजा मारदे मलंग देखे लंगदे,

रंग दे ओ सावरिया .....

कच्चे रंग खेड खेड थक गये हार गये,

हुन ता प्रभु जी मेरी बिगड़ी सवार दे,

रोम रोम मेरा अंग अंग रंग दे,

रंग दे ओ सावरिया.....

ऐसा रंग चाड सानु चढ़न खुमारिया,

कटन मरन सारे दुःख ते बीमारियाँ,

साधु सेवा नाल सानु सत्संग दे,

रंग दे ओ सावरिया,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।