तूने दिया जो प्यार कहीं और ना मिला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तूने दिया जो प्यार कहीं और ना मिला,

चलता रहे बस सँवारे यु ही ये सिलसिला,

हमको मिले हो सांवरे तुम तो नसीब से,

मेरे दुखो को देखा है तुमने करीब से,

छाई घटाए पर मेरा सूरज नहीं ढाला,

चलता रहे बस सांवरे यही सिलसिला,

तूने दिया जो प्यार कहीं और ना मिला

अपनों में ढूंढा था तुझे गेरो में तू मिला,

आई बहार पर मुझे पतझड़ में मुझे तू मिला,

हारे को क्यों हो थमाते अब ये पता चला,

चलता रहे बस सांवरे यही सिलसिला,

तूने दिया जो प्यार कहीं और ना मिला

दुभि है कश्तिया जो थी किनारो पे,

मझधार से निकल गया तेरे इशारो से,

इस श्याम का किया प्रभु बस तूने ये भला,

चलता रहे बस सांवरे यही सिलसिला,

तूने दिया जो प्यार कहीं और ना मिला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।