आज तेरा जगराता माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता,

जगमग करती पावन ज्योति, हर कोई शीश झुकाता।

माता माता माता माता...

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता,

आज जगराता है, माँ का जगराता है।

माथे टीका, हाथ में चूड़ा, सर पे सोहे मुकुट सुनेहरा।

नैनो में है प्यार का अमृत, दिल ममता का सागर गहरा।

भक्त जानो से अम्बे तेरा बड़ा ही निर्मल नाता॥

माता माता माता माता...

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता।

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता॥

वैष्णो देवो को प्रणाम करूँ मैं सो सो बार।

चिन्तपुरनी को प्रणाम करूँ मैं सो सो बार।

ज्वाला माई को प्रणाम करूँ मैं सो सो बार।

सो सो बार, सो सो बार, सो सो बार॥

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता।

आज जगराता है, माँ का जगराता है॥

मेह्शासुर को मारने वाली, रक्तबीज संघारने वाली।

तू चामुंडा, तू रुद्रानी, खडग खप्पर धारने वाली।

काली तेरे रूप से तो काल भी घबराता॥

माता माता माता माता...

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता।

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता॥

नैना देवी को प्रणाम करूँ मैं सो सो बार।

अम्बा रानी को प्रणाम करूँ मैं सो सो बार।

मनसा देवी को प्रणाम करूँ मैं सो सो बार।

सो सो बार, सो सो बार, सो सो बार

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता।

आज जगराता है, माँ का जगराता है॥

जिनके सर पे हाथ तुम्हारा तूफानों में पाए किनारा।

वो ना बहके वो ना भटके तू दे जिनको आप सहारा।

जहाँ पे तेरा हो जगराता, कष्ट वहां ना आता॥

माता माता माता माता...

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता।

आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता॥

तेरे चोले लो प्रणाम भवानी सो सो बार।

तेरी पिण्डीओं को प्रणाम भवानी सो सो बार।

तेरे भक्तों को प्रणाम भवानी सो सो बार।

तेरी कंजकों को प्रणाम भवानी सो सो बार।

शेरा वाली माता तेरी सदा ही जय।

ज्योत वाली माता तेरी सदा ही जय।

संकट हरनी माता तेरी सदा ही जय।

मंगल करनी माता तेरी सदा ही जय।

सारे बोलो जय माता दी।

प्रेम से बोलो जय माता दी।

ऊँचे बोलो, जय माता दी।

जोर से बोलो, जय माता दी।

मिल के बोलो, जय माता दी।

भक्तो बोलो, जय माता दी।

संतो बोलो, जय माता दी।

जय माता दी, जय माता दी।

जयकारा ज्योति वाली दा, बोल सांचे दरबार की जय।

जय हो, जय हो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।