उसको मेरी सेवा का अधिकार है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

उसको मेरी सेवा का अधिकार है,

करता जो अपनी माँ से प्यार है,

उसको ही मिलता ये दरबार है,

करता जो अपनी माँ से प्यार है,

मुझको तो छप्पन भोग लगाते हो,

माँ को एक रोटी को तरसाते हो,

ऐसे बेटे को तो धिकार है,

करता न अपनी माँ से प्यार है,

उसको मेरी सेवा का अधिकार है,

करता जो अपनी माँ से प्यार है,

मेरा दरबार बड़ा ही सजाते हो,

माँ को एक कमरा नहीं दे पाते हो,

उसका तो जीवन ही बेकार है,

करता न अपनी माँ से प्यार है.

उसको मेरी सेवा का अधिकार है,

करता जो अपनी माँ से प्यार है,

मुझको तो अपने घर में लाते है,

माँ को वृद्ध आशरम में छोड़ आते हो,

ऐसा घर मुझको न स्वीकार है,

करता न अपनी माँ से प्यार है,

उसको मेरी सेवा का अधिकार है,

करता जो अपनी माँ से प्यार है,

दर्शन को तेरे माँ ये तरसी है,

आजा मिलने को तुझपे मरती है,

तेरे आने के ना आसार है,

फिर भी क्यों तेरा इंतज़ार है,

बेशक तू मेरा गुनहगार है,

फिर भी मुझको तो तुजसे प्यार है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।