तेरे मंदिर मैनू ले आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जिस वेले दम ही निकल गया, मेरी किती हर तदबीर दा,

तेरे मंदिर मैनु लै आया माँ रास्ता मेरी तक़दीर दा,

जदों हत्थ किसे ने ना फड़ेया, इस दर दर रूले फ़क़ीर दा,

तेरे मंदिर मैनु लै आया माँ रास्ता मेरी तक़दीर दा,

मैं वक़्त दी चक्की विच पिस्स के, जदों परखेया हर इक रिश्ता माँ,

ओह बन के दरिंदा पेश आया, जिन्नू सम्झेया सी मैं फरिश्ता माँ,

दर्द सहना मुश्किल जदों होया, दुख्खां दे चुभदे तीर दा,

तेरे मंदिर मैनु लै आया माँ रास्ता मेरी तक़दीर दा,

एह दुनिया ए मंडी ग़र्ज़ां दी, बेग़र्ज़ किसे दा प्यार नहीं,

ऐथे निकल ए जांदा जदों मतलब, कोई मीत नई कोई यार नई,

जदों असर किसे ते ना होया, अखियां चों वगदे नीर दा,

तेरे मंदिर मैनु लै आया माँ रास्ता मेरी तक़दीर दा,

माँ खम्भ जिन्न्हा दे टुट्ट गए, किवें पंछी लोन उडारियां,

निर्दोष माँ मुँह ओह वी फेर गए मैं जिन्हां नू वाजां मारियाँ,

जदों हर इक रंग मैं वेख लिया, इस दुनिया दी तस्वीर दा,

तेरे मंदिर मैनु लै आया माँ रास्ता मेरी तक़दीर दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।