हम आईल तोहरी दुअरिया हो, दिलवा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हम आईल तोहरी दुअरिया हो, दिलवा में आस लग गइल,

कहवाँ जाई छोड़ के मंदिरवा हो, दिलवा में आस लग गइल,

तोहें हमर गाँवां लोग के एगो महतारी ह,

तोहरी महिमा मैया बड़ भारी ह,

सब आबे तोहरी दुअरिया हो, दिलवा में आस लग गइल,

कहवाँ जाई छोड़ के मंदिरवा हो, दिलवा में आस लग गइल,

सुनलये मैया तोंहे मरल जिंदा कयेलु,

माँग के सिन्दुर अबला नारी के लोटेलु,

रोवत रोवत अइली तोर मंदिरवा हो,दिलवा में आस लग गइल,

कहवाँ जाई छोड़ के मंदिरवा हो,दिलवा में आस लग गइल,

दिलवा में आस लेके, ऐगो नारी अइली,

अपन श्रृंगार मैया तोरा के अर्पण कइली,

सुनीलेलो उनकर पुकरिया हो, सुहागन बना गइल,

कहवाँ जाई छोड़ के मंदिरवा हो, दिलवा में आस लग गइल

हम सब आस लेके , आइली तोर दुअरिया,

हम सब के असरा, पूरेहियो तु मैया,

गावेल डबलू तोर भजनवा हो ,दिलवा में आस लग गइल,

कहवाँ जाई छोड़ के मंदिरवा हो,दिलवा में आस लग गइल,

हम आईल तोहरी दुअरिया हो, दिलवा में आस लग गइल,

कहवाँ जाई छोड़ के मंदिरवा हो, दिलवा में आस लग गइल,

जय माँ काली

प्रभाकर कुमार (डबलू)

सोहजना, गिद्वौर , जमुई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।