मेरे पापा जैसा कोई नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

चाहे वो इंसान हैं पर मेरे लिए भगवान् हैं,

बिन मांगें सब कुछ देते बदले में कुछ ना लेते,

क्या कहना उनके बारे है,

मेरे पापा जैसा कोई नहीं,

मेरे पापा सबसे प्यारे हैं,

मेरे पापा जैसा कोई नहीं,

जब था बचपन मेरा पापा बड़े खलौने लाते थे,

जो भी कहता में था पापा मेरे बोल पुगाते थे,

उन्होंने मेरे खाब सवारे हैं,

मेरे पापा जैसा कोई नहीं,

लाकर दी थी सइकिल मुझको जब मैं स्कूल में पढ़ता था,

समय समय पर सब मिल जाता कहना भी ना पड़ता था,

वो जानते सब इशारे हैं,

मेरे पापा जैसा कोई नहीं,

कदम कदम पे साथ चलके ज़िन्दगी मेरी संभाली है,

फूलों की रखवाली जैसे करता कोई माली है,

कांटे चुनके तोड़े सारे हैं,

मेरे पापा जैसा कोई नहीं,

ऐसी कोई बात नहीं जो पापा ने ना मानी हो,

मेरी आँख में अब तक जिसने आने दिया ना पानी हो,

सागर पापा बड़े न्यारे हैं,

मेरे पापा जैसा कोई नहीं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।