ना तो शिरड़ी की गलियां सोती है

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॥ पावन पाठ ॥

ना तो शिरड़ी की गलियां सोती है,

ना तो शिरड़ी का राजा सोता है,

आओ चलो शिरड़ी में देखो एसा यहाँ होता है,

ना तो शिरड़ी की गलियां सोती है,

जो भी फकीर के मन को भाये,

शायद फ़कीर होगा,

जिसने साईं को दिल से पुकारा कुछ तो जरुर होगा,

साईं उसको गले से लगाते है कोई तन्हाई में जब भी रोता है.,

ना तो शिरड़ी की गलियां सोती है,

आओ चलो शिरड़ी में देखो,

ऐसा यहाँ होता है,

ना तो शिरड़ी की गलियां सोती है....

साईं से इतनी गुज़ारिश है मेरी,

हो न कभी ये जुदाई,

दामन में अपने छुपाके साईं तू ही देना गवाही,

उसे जीवन मरण की खबर क्या है जो साईं के चरणों में होता है,

ना तो शिरड़ी की गलियां सोती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।