हर घड़ी मेरी बंदगी तुम हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हर घड़ी मेरी बंदगी तुम हो,

सांवरे मेरे ज़िंदगी तुम हो जिया लागे न लागे तुझ बिन सांवरे,

मेरे होठो की हसी तुम हो,

ज़िंदगी की हर ख़ुशी तुम हो,

जिया लागे ना लागे न तुझ बिन सांवरे,

प्रीत जोड़ी है तुमसे जन्मो की,

मैं दीवानी नाचती हु बन से जोगन सी,

होठ मैं हु बांसुरी तुम हो,

गीतों की मेरे श्यारी तुम हो,

जिया लागे ना लागे न तुझ बिन सांवरे,

जबसे आये हो मेरे जीवन में,

सावली सूरत वसी है मेरी अँखियाँ में,

नैनो की मेरे रोशनी तुम हो,

राग मैं हु रागनी तुम हो,

जिया लागे ना लागे न तुझ बिन सांवरे,

दम मेरा निकले बाहो में तेरी,

जियु जब तक मैं चालू रहो में तेरी,

रोमी की दीवानगी तुम हो,

इश्क़ की मेरे दीवानगी तुम हो,

जिया लागे ना लागे न तुझ बिन सांवरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।