ऐसी आज दुआ दे बाबा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ऐसी आज दुआ दे बाबा,

तुझमे ही मैं बन जाऊ मैं,

भाव सागर के सुख में दुःख में,

कभी ना तुझे बिसराऊ मैं,

करुणासागर तूने साई हर युग में अवतार लिए,

कलयुग में भी आ कर तूने अनगिन है उपहार दिया,

करलू दर्श निरंतर बाबा प्यास नैन की भुजाउ मैं,

ऐसी आज दुआ दे बाबा.....

ज़िंदगी अनभुज पहेली प्रश्नो की बोशार है,

ये दुनिया है भूल भूलिया माया का बाजार है,

हु साई अनजान मुसाफिर रहा बता गबराहु मैं,

ऐसी आज दुआ दे बाबा....

तेरी समादि पर फूलो की माला चढ़ाने आया हु,

सब कुछ तेरा कुछ नहीं मेरा लाया जो ला पाया हु,

बन कर दास रहु तेरा साई मेरा जनम बिताऊ मैं,

ऐसी आज दुआ दे बाबा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।