ठोकर खाता फिर रहा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे चरणों में मैं आया, मेरी सुन ले माँ तु पुकार,

ठोकर खाता फिर रहा माँ, मुझे बेटा कह के पुकार,

मैय्या मेरी शैरोवाली, कितनी भोली भाली है,

दर पे तेरे जो भी आता, भरती झोली खाली है,

मुझपे भी माँ कर दे, तु प्यार भरी बौछार,

ठोकर खाता फिर रहा........

माँ बेटे का जग में नाता, किसने ना पहचाना है,

क्या में तेरा लाल नहीं, जो तुने ना पहचाना है,

मै भी दर पे तेरे आया, मुझे बेटा कह के पुकार,

ठोकर खाता फिर रहा.........

ऊंचे पर्वत बैठके मईया, सबके मुजरे लेती है,

जाकि जैसी कामना होती, वैसा ही फल देती है,

मैं भी दर पे तेरे आया, अब करना ना इंकार,

ठोकर खाता फिर रहा..........

तेरे चरणों की धूली से, हम सब भी माँ तरजाये,

कब से व्‍याकूल बैठे, तेरी एक झलक जो मिल जाये,

करे "सोनू शर्मा" कब से, तेरे दर्शन का इंतजार,

ठोकर खाता फिर रहा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।