नित महिमा मैं गाउँ मैया तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

और क्या माँगू मैं तुमसे माता,

बस धूल चरण की चाहूँ,

पल पल याद करूँ मैं तुमको,

मैं हिरे रतन ना चाहूँ,

अब तक तेरा प्यार मिला है,

माँ हर मांग मिली मेरे मन की,

आगे भी तू रखना दया माँ,

तू मालिक है त्रिभुवन की,

नित महिमा मैं गाउँ मैया तेरी,

मुझे ना कुछ और चाहिए,

सदा ज्योत जगाऊँ मैया तेरी,

नित महिमा मैं गाउँ मैया तेरी,

मुझे ना कुछ और चाहिए

तेरा नाम ही तो मेरा माँ सहारा है,

सिवा तेरे मैया कोण हमारा है,

तेरे द्वार की मिले दरबानी,

मुझे ना कुछ और चाहिए,

नित महिमा मै गाउँ मैया तेरी,

मुझे ना कुछ और चाहिए

बस प्यार मिले हमको तुम्हारा माँ,

छूटे शर्मा से ना तेरा द्वारा माँ,

तेरे चरणों में बीते जिंदगानी,

मुझे ना कुछ और चाहिए,

नित महिमा मै गाउँ मैया तेरी,

मुझे ना कुछ और चाहिए

सदा ज्योत जगाऊँ मैया तेरी,

मुझे ना कुछ और चाहिए,

नित महिमा मै गाउँ मैया तेरी,

मुझे ना कुछ और चाहिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।