मेरे मन की उडी पतंग

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन की उडी पतंग पकड़ लो श्याम पतंग की डोर,

अटके न भटके कही उड़े ये ब्रजमंडल की और,

सच्चे कर्मो की चरखी में भाव का भर के धागा,

जिधर तू चाहे उधर तू उदा ले इतना ही हमने माँगा,

इसे काटना पाये कोई जितना लगा ले जोर,

मेरे मन की उडी पतंग पकड़ लो श्याम पतंग की डोर,

अरमानो के अंबर में उची उड़ती जाए,

कही न उजले कही भी न टकराये,

श्याम तेरे ही भरोसे माजा दिया छोड़,

मेरे मन की उडी पतंग पकड़ लो श्याम पतंग की डोर,

पेच लड़ावे कोई भी कितना हवा में उड़ती जाये,

श्याम नाम का पका धागा कोई काट न पाए,

पारस पतंग उड़ उड़ कर चली वृद्धावन की और,

मेरे मन की उडी पतंग पकड़ लो श्याम पतंग की डोर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।