अंबे मैया जी का द्वारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अंबे मैया जी का द्वारा चार धामों से है न्यारा,

इस सारे जहां में दूजा के मैया जैसा और नहीं,

जाति आते हैं दर्शन को छुले मां के कमल चरणों को,

इस सारे जहां में पूजा के मैया जैसा और नहीं,

दर पर आती हैं भक्तों की टोलियां,

उनकी होती है न्यारी न्यारी बोलियां

दूर करती है सबकी कमजोरियां,

मां भारती है सबकी ही झोलियां,

माँ ने भव से हजारों को तारा,

पापी भक्तों को जग से उबारा

भार पृथिवी का माँ ने है उतरा,

महिषासुर को भी मैया जी ने मारा,

तेरी जय हो अंबे माई जिसमे याद किया तू आई.

इस सारे जहान में दूजा के मैया जैसा और नहीं,

द्वार तेरे की सुन के मशहूरियाँ है दर पर आई हूं तय करके दूरियां

ना लाई मैं हलवा चना पूरियां कैसे बतलाऊं मामा मजबूरियां,

मेरी बिगड़ी बना दे तो मैं जानू पार हमको लगा दे तो मैं जानू,

गम कब तक पढ़ेंगे उठाने और कब तक रहेंगे बेगाने,

तेरी जय हो अंबे माई जिस ने याद किया तू आई,

इस सारे जहान में दूजा की मैया जैसा और नहीं

मैया तूने हमें भुला ना तेरा दर है मां मेरा ठिकाना,

मेरी छोटी मोटी गलतियां मेरी मैया माफ करना,

मैं अगले बरस फिर आऊंगी तेरी लाल चुनरिया लाऊंगी,

तब सारे भगता देखे गे,मेरी मैया सजेगी शेरों वाली,

तेरी जय हो अंबे माई जिस ने याद किया तू आई

इस सारे जहां ने पूजा के मैया जैसा और नहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।