मेला बन्दिया चार दिना दा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इथे बैठ किसे ने नहीं रहना मेला बंदे चार दिना दा,

चार दिना दा ओ मेला चार दिना दा,

कोड़ी कोड़ी जोड़ बंदे महल बणांदा,

सास जदो निकले कोई रख वी न पानदा,

एहना सवासा न कोडियां ना रोल वे,

मेला बन्दिया चार दिना दा,

धीया पुतरा ले तू पाप कमान्दा,

अंत ता वेले कोई सोगी वि न जांदा,

मतलबी सारी रिश्ते दरिया,

मेला बन्दिया चार दिना दा,

जिस कम नु आया था ओहियो कम भुलियाँ,

खटन की तू आया था की खत चलियाँ,

तेनु ज़माने सूली उते टंगना,

मेला बन्दिया चार दिना दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।