ला दे दातिए अपने नाम वाली मेहँदी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ला दे दातिए अपने नाम वाली मेहँदी,

नाम वाली मेहँदी जेहड़ी कदे वी नहीं लैंदी,

यह मेहँदी नहीं मिलदी बाज़ारो,

नहीं मिलदी लख ते हज़ारो,

किस्मत वाले लौंदे तेरे नाम वाली मेहँदी,

ला दे.........

इस मेहँदी दी चमक अनोखी,

एथे मिलदी ए बड़ी सौखी,

चढ़ के फिर ना उतरे तेरे नाम वाली मेहँदी,

ला दे........

यह मेहँदी तेरे भगता ने लाई,

ला के हो गई तेरे नाम दी शौदाई,

चडया रंग सवाया तेरे नाम वाली मेहँदी,

ला दे.......

यह मेहँदी दाती मेरे वी ला दे,

नाम अपने वाला रंग चढ़ा दे,

चढ़ के फिर ना उतरे तेरे ज्ञान वाली मेहँदी,

ला दे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।