जोगी तेरे दर की है बातें निराली

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॥ पावन पाठ ॥

जोगी तेरे दर की है बातें निराली,

जो भी दर आया झोली भर दे तु खाली,

कुछ ना कहें हम फिर भी तु जाने,

देता तु रहता है किसी भी बहाने ,

हर सुख मिले तेरा बनके सवाली,

जोगी तेरे दर की है.......

चाँद सितारे दर सूरज है झुकता,

तु जो चलाए कभी काम ना रुकता,

मस्त बनाए तेरी गुफा मतवाली,

जोगी तेरे दर की है......

सारा जमाना तेरे दर का भिखारी,

तेरी दया पे टिकी दुनिया ये सारी,

तेरी बलिहार ने भी लगन लगा ली,

जोगी तेरे दर की है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।