कुज ता पाना पेना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ गया तेरे द्वार मैं चल के बेठ गया तेरा दर मल के,

लख धके कोई मारे दर्शन करके ही जाना,

कुज ता पाना पेना मैं दर तो खाली नही जाना,

एह झूठी माँ दुनिया तेरी मारू मेनू ताने,

देखि माये चढ़ ना जाई जान के बेगाने,

बिन तेरे माँ बेडा किसे ने पार नही लाना,

कुज ता पाना पेना मैं दर तो खाली नही जाना,

आखिरी साह तक ना तेरा बुलीया उते रहना

तेरे कोलो संगना नही माँ होर किसे तो लेना,

पा झोली विच प्यार माये तेरा प्यार ही बस पौना,

कुज ता पाना पेना मैं दर तो खाली नही जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।