जागो मोहन प्यारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जागो...

जग उज्यारा छाए, मन का अन्धेरा जाए,

किरणों की रानी गाए, जागो हे मेरे मन मोहन, प्यारे

जागे रे जागे रे सारी कालिया जागी

नगर नगर सब कालिया जागी,

जागे रे जागे रे, जागे रे जागे रे जग जग

जागो मोहन प्यारे, जागो...

नवयुग चूमे नैन तिहारे

भीगी भीगी अखिओं से मुस्काए, यह नयी भोर तोहे अंग लगाए

बाहे फैलाओ ओ दुःख हारे, जागो मोहन प्यारे, जागो...

जिसने मन का दीप जलाया, दुनिया को उसने ही उजला पाया

मत रहना अखिओं के सहारे, जागो मोहन प्यारे, जागो...

किरण परी गगरी छलकाए, ज्योत का प्यासा प्यास भुझाए

फूल बने मन के अंगारे, जागो मोहन प्यारे, जागो...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।