मेरा साईं है रंग रसियाँ

पारंपरिक
महादेव भजन साईं भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कभी शिव बन कर वो हम को भोले के दर्शन कराये,

कभी बन कर गुरु वो हमको गुरुबानी और शब्द सिखाये,

कभी बन के फकीरी वो हम को अलहाकी बाते है बताये,

होली खेल आये जैसे कृष्ण कन्हियाँ,

मेरा साईं है रंग रसियाँ,मेरा साईं है मन बसियाँ,

तू ही मेरी चाहत है और तू ही मेरा प्यार है,

तेरी ही रहमत से साईं मेरा बेडा पार है,

मेरी इस कश्ती का साईं तू ही खिवैयाँ,

मेरा साईं है रंग रसियाँ,मेरा साईं है मन बसियाँ,

मन के मंदिर में तो साईं तेरी ही बस मूरत है,

तू अल्लाह का नेक फ़रिश्ता और भगवान की सूरत है,

कोई पिता कहता है तुझको कोई कहे मैयां,

मेरा साईं है रंग रसियाँ,मेरा साईं है मन बसियाँ,

जिसको दुनिया ने ठुकराया तूने दिया सहारा है,

नैया जिसकी डूब रही थी तूने दिया किनारा है,

प्यार सभी से करता है शिरडी का सैया,

मेरा साईं है रंग रसियाँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।