अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां,

भला सबदा हमेशा मंगा तेरे कोलो साईंयां,

सुख हॉवे ते मैं दाता तेरा शुकर मनावा,

दुःख विच शिकेता कदे तेनु न सुनावा,

निवा होके हर वेले नेक कामियां,

हँसी ख़ुशी मैं निभावा जो भी मेरे हिस्से आइयाँ,

अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां....

तेरा भाना मीठा लागे जो वी करे सोइयो चंगा,

तेरी रजा विच बीते जेह्डा समये ओही चंगा,

तेरे हाथा विच डोरी जीवे चाहवे नचावे,

कटपुतली मैं दाता जो तू चाहवे सो करावे,

अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां....

हक़ किसे दा न मारा दिल कोई न दुखावा,

जिहना हॉवे मेरे कोलो कम सबना दे आवा,

कड़े बोल कोई मंदा मेरे मुख ते न आवे,

तेरा बाँदा भूल के वि दिल कोई ना दुखावे,

अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां..

सब कुछ ते तू दिता की होर तेठो मंगा,

बस एहना वर देदे तेरे रंगा विच मैं रंग,

तेरे दासा दी गुलामी तेरे सेवका दी सेवा,

एह मंगदा तेरे तो हर वेले साईं सेवा,

अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां..

जदों दुनिया तो जावा दुःख सबना नु हॉवे,

याद कर कर मेनू हर दिल पेया रोवे,

जद साहिल दी हॉवे तेरे दर सुनवाई,

हर कोई साईंयां देखे तेरी वडी है वडहाई,

अरदास करा मैं हर वेले एहो साईंयां..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।