शेरोवाली बुलालो हमे भी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरोवाली बुलालो हमे भी दवार आने के काबिल नही है,

हम गुनाहागार है माफ कर दो सर उठाने के काबिल नही है,

गम ने मारा है गम ने सताया गम ने हमको परेशा किया है

गम मे हम इस कदर दब चुके है सर उठाने के काबिल नही,

गरदीशो मे हम एेसे फसे है जैसे बादल मे चनदा छिपा है,

जुलम को ठहा रहा है जमाना जो बयाने के काबिल नही,

हमको परवाहा नही है जमाना रुठता तो रुठे खुशी से,

एक सलाहा है ना तुम रुठ जाना हम मनाने के काबिल नही है,

मुशकिल अब आके पथरा गई है धङकनो का भरोसा नही,

जिनदगी मौत से लड रही है लब हिलाने के काबिल नही है,

दिल मे आजाअो महेमान बनकर दिल है के मानता ही नही,

दरद ऐ दिल का बडा जा रहा जो दवाने के काबिल नही है

(पोस्टिंग बय : रविन बंसल)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।