॥ पावन पाठ ॥
जिसपर ये दिल फ़िदा है दिलदार वो निराला,
मेरे दिल पे राज करता मेरा यार मुरली वाला,
है दिल में याद उसकी मेरे लव पे आह भी है,
सीने में दर्द उसका हसरत की निगाह भी है,
इस मर्ज की दवा है घनश्याम मुरली वाला,
जिसपर ये दिल फ़िदा है ....
जाता हु जिस गली में मुझे वो ही नजर आता,
सजदे में सर झुकता तुम्हे सामने मैं पाता,
अंग संग मेरे सदा है मेरा यार मुरली वाला,
जिसपर ये दिल फ़िदा है ...
छलके गे अर्श बिंदु उसे देखना जो चाहो,
खुद की मिटा दो हस्ती अगर मिटाना उसे चाहो,
खुद ही में वो खुदा है,
जग को चलाने वाले,
जिसपर ये दिल फ़िदा है