प्रेम की डोर में बंधकर

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज: बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन...

-: शेर :-

अनोखी शान है तेरी, निराला है चलन तेरा,

ना कोई ज़ात है तेरी, ना कोई है वरण तेरा,

मकां है ला-मकां तेरा, वतन है बे-वतन तेरा,

वो तेरा है तू उसका है, जो करता है भजन तेरा,

वो तेरा है तू उसका है, जो करता है भजन तेरा,

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प्रेम की डोर में बंधकर, प्रभु श्री राम हैं आये,

वो झूठे बेर भीलनी के, प्रभु ने प्रेम से खाये ।।

रोज़ झाड़ू लगाती थी, राह कलियां बिछाती थी,

प्रभु जी आएंगे मेरे, वो फूली ना समाती थी,

भगत की भावना के वश में, ये भगवान् बिक जायें ।।

प्रेम की डोर में बंधकर, प्रभु श्री राम हैं आये......

भगत की हाँकने गाड़ी, स्वयं भगवान् चल दिये,

वो भरने भात नरसी का, बढाने मान चल दिये,

प्रभु को भाव भाते हैं, चतुरता नेक ना भाये ।।

प्रेम की डोर में बंधकर, प्रभु श्री राम हैं आये......

प्रेम की डोर में बंधकर, प्रभु श्री राम हैं आये,

वो झूठे बेर भीलनी के, प्रभु ने प्रेम से खाये ।।

~ समाप्त~

संकलनकर्ता :- राज कुमार टाँक, बुखारा बिजनौर ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।