साईं जी से बोलना

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन में ये अरमान है मुझे जाना शिरडी धाम है,

जा कर साईं से बोलना साईं साईं बोलना,

साईं जी से बोलना..

हर दुःख संकट में मिला करो मेरे साईं मुझपे दया करो,

ना मैंने किसी को पुकारा है,साईं तू मेरा सहारा है,

अरमान भी निकले दर पे तेरे मेरी जान भी निकले दर पे तेरे,

जा कर साईं से बोलना साईं साईं बोलना,

साईं जी से बोलना..

किरपा की नजरिया अब तो करो मेरे साईं मेरी झोली भरो तेरे नाम पे मेरा गुजरा है,

साईं तू मेरा सहारा है,तेरा नाम जपु गी जय साईं निष्काम जपु गी जय साईं,

मेरी किस्मत का दर खोलना,

साईं साईं बोलना,

दीवाना करके हस्ते हो तुम कितने दिलो में वस्ते हो,

कोई मुझसे पूछे क्या हो तुम हर एक मजहब जुबा हो तुम,

मुस्लिम भी लगाये नारा हिन्दू भी लगये जैकारा,

सब संतो का है बोलना साईं साईं बोलना

जा कर साईं से बोलना साईं साईं बोलना,

साईं जी से बोलना..

माना साईं एक फ़कीर है सूफी बनना तकदीर है,

कोई इसको मिटा नही पायेगा ये एसी लिखी तहरीर है,

ये ज़मीर भी बोला बाबा साईं सूफी हमसर भी बोला मौला साईं,

साईं जैसा न जहा में कोई और न,

साईं जी से बोलना..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।