खुशबु के बिना चन्दन सुना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खुशबु के बिना चन्दन सुना,

उपवन सुना ये बहार बिना,

मैं सुनी सांवरियां तेरे प्यार बिना,

प्रेम दीवानी बनी सँवारे लोक लाज बिसराई,

अनजानी बेगानी कह कर जग ने हसी उड़ाई,

तुम क्या जानो बिरहन की गति क्या होती है दिलदार बिना,

मैं सुनी सांवरियां तेरे प्यार बिना,

तन मन सुना मधुवन सुना नन्द गऊ बरसना,

बेदर्दी से प्रीत लगा के पड़ा बहुत पश्ताना,

माजी के बिना नैया सुनी गंगा सुनी हरिद्वार बिना,

मैं सुनी सांवरियां तेरे प्यार बिना...

चूड़े बिना चलाई सुनी चंदा बिना चकोरी,

ऐसे ही तेरे बिन सुनी ये बिशवान किशोरी,

माँ बाप बिना बचपन सुना,

नारी सुनी शृंगार बिना,

मैं सुनी सांवरियां तेरे प्यार बिना,

ऐसे मिष्ठूर बने कन्हैया सौतन के भर माये,

तीन दीना के वादा कर के लौट न वापिस आये,

श्रद्धा के बिन भक्ति सुनी ब्रिज वास किशन दातार बिना,

मैं सुनी सांवरियां तेरे प्यार बिना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।