मेरी ज़िन्दगी है साईं

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा दिल है मेरी जा है मेरी ज़िन्दगी है साईं ॥

ये तेरा कर्म है साईं हो मेरी बन्दगी है साईं ,

मुझे अपने दर भुलाया मैं गरीब था निभाया,

तेरा इश्क मेरी पूजा,तेरी याद बंदगी है,

मुझे इश्क साईं से ....

ये तेरा कर्म है साईं.....

है मेरा साईं नाथ ज़माने से निराला,

आँखों में छलक ता है महोबत का उजाला,

किरपा मेरे साईं की मेरे साथ साथ है

मस्ती में बोलता है हर एक चाहने वाला,

ये तेरा कर्म है साईं मेरी ज़िन्दगी है साईं,

शिरडी के साईं राजा मेरा भाग तू जगा जा,

ये गुलाम तेरा साईं तेरी करता नोकरी है,

तेरा इश्क मेरी पूजा,तेरी याद बंदगी है,

मुझे इश्क साईं से ....

ये तेरा कर्म है साईं.....

जब सहारे छुट जाते है दुनिया के सारे,

साईं तेरी रहमत मुझे उस वक़्त पुकारे,

लेता हु तेरा नाम जो मुश्किल की घडी में,

तूफ़ान छोड़ जाता है खुद मुझको किनारे,

मेरा दिल है मेरी जान है मेरी ज़िन्दगी है साईं,

ये तेरा कर्म है ...

तारिक पे रहमतो की करदो निगाहों साईं बाबा,

मस निजामी बोले तेरे पास क्या कमी है,

तेरा इश्क मेरी पूजा,तेरी याद बंदगी है,

मुझे इश्क साईं से ....

ये तेरा कर्म है साईं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।