बैठा परदे में बांके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक झलक दिखला कर अपनी छवि छुपा ले प्यारे,

बैठा परदे में बांके बिहारी,

बड़ी बड़ी अँखियो से अखियां लड़ाये,

रातो की नींदियाँ चैन चुराए,

ओ वृंधागिरधारी,

बैठा परदे में बांके बिहारी......

है बांकी नजर है बांकी आधा है प्यारी,

इस बांकी अदा पे है फ़िदा दुनिया सारी,

चित चोर करे चित की चोरी तू बनवारी,

हे श्याम जाऊ तुमपे वारि मैं बलिहारी बलिहारी,

बैठा परदे में बांके बिहारी,

होठ की मुरली गाये तराना श्याम है दीवानो का दीवाना,

सच्चा प्रेम पुजारी,

बैठा परदे में बांके बिहारी,

आँखों पे पड़ा पर्दा जो हटा कर तू आये

खिल जाये सुमन पतझड़ में जो मुरझाये,

गम से भरी राते रोशन हो जाये,

हो जाऊ मैं पावन सावन करुणाका जो बरसाए बरसाए,

बैठा परदे में बांके बिहारी,

प्यार में एक मुश्किल ले बैठा,

तुझको बेधड़क दिल दे बैठा,

बैठा परदे में बांके बिहारी,

लूट लूट के लटो में कितने दिल लटके है,

दिखला के झलक दिल दीवानो के झटके है,

नटवर तेरे खेल निराले नटरे है,

त्रिलोक में तू सबसे हट के है हट के है,

बैठा परदे में बांके बिहारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।