खुद से खुद जब मिल जायेगा

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॥ पावन पाठ ॥

खुद से खुद जब मिल जायेगा,

बन जायेगे कांटे फूल,

साई चमन में सुख ही सुख है,

साई लगन को कभी न भूल,

खुद से खुद जब मिल जायेगा,

मत फैलाये इंसान के आगे अपने झोली अपने हाथ,

पाप का चेहरा धूल जायेगा मल उसके चरणों की धूल,

खुद से खुद जब मिल जायेगा,

तेरा चलना तेरा रखना उसकी मर्जी उसका काम,

साई उसकी करे हिफाजत साई को जो करे कबुल,

खुद से खुद जब मिल जायेगा...

बहार की मन मोजी बाते भट काती है मंजिल से,

अंदर है आनंद का झूला मन ही मन ख़ुशी से झूल,

खुद से खुद जब मिल जायेगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।