जाओ कहा मैं मोहनभर दो दया से द्वार पे तेरे फैलाया है दमन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तेरे दर का याचक हु,

जाओ कहा मैं मोहन,

भर दो दया से दवार पे तेरे फैलाया है दामन,

जाऊ कहा मैं मोहन,

मैं इस जग से क्या सुख मांगू जग तो विष की धार है,

मगर श्याम तुम सुख सागर हो बस यु हाथ पसरा है,

एक बून्द बस हाथ पे रख दो खिल जाये सुना मन,

जाऊ कहा मैं मोहन....

हार दिया दिल आपको जिसने वो जग से कब हारा,

आप ने उसका मान बड़ा कर जीवन और निखारा है,

इतनी करुणा बरसाई है टूट गए दुःख बंधन,

जाऊ कहा मैं मोहन.......

तुमने सबको सुख बांटा है दुखियो का दुःख धोया है,

लाज रखी है तुमने उसकी जो तेरे दर पे रोया है,

मेरी भी सुध लो सांवरियां अँखियो में है सावन,

जाऊ कहा मैं मोहन......

किसको मीत बनाऊ अपना मतलब का जग सारा है,

दीन दुखी बेकस का जग में तू ही एक सहारा है,

घजे सिंह है शरण में तेरी मत रखना मधुसुधन,

जाऊ कहा मैं मोहन,...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।