वो फूल ना अब तक चुन पाया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वो फूल ना अब तक चुन पाया जो फूल चढ़ाने है तुझपर,

मैं तेरा द्वार न ढूंढ सका साई भटक रहा हु डगर डगर,

वो फूल ना अब तक चुन पाया....

मुझमे ही दोष रहा होगा मन तुझको अर्पण कर न सका,

तू मुझको देख रहा कब से मैं तेरा दर्शन कर न सका,

हर दिन हर पल चलता रहता संग्राम कही मन के बिहतर,

मैं तेरा द्वार न ढूंढ सका ......

क्या दुःख क्या सुख सब भूल मेरी मैं उलझा हु इन बातो में,

दिल खोया चांदी सोने में सोया मैं वेसुध रातो में,

तब ध्यान किया मैंने तेरा टकराया पग से जब पत्थर,

मैं तेरा द्वार न ढूंढ सका ......

मैं धुप छाओ के बीच कही माटी के तन को लिए फिरा,

उस जगह मुझे थामा तूने मैं भूले से जिस जगह गिरा,

अब तुहि पग दिखला मुझको सदियों से हु घर से बेघर,

मैं तेरा द्वार न ढूंढ सका ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।