तेरा दीवाना है दीवाना है दीवाना है,

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॥ पावन पाठ ॥

साईं के इश्क में मर जाने को परवाह न है,

तेरा दीवाना है दीवाना है दीवाना है,

तेरी अब लागी लगन है तुझे अब हो ना मिलन है,

होगी अब दूर जुदाई रसी करती है अब खुदाई,

इश्क में तेरे मुझे हद से गुजर जाना है,

तेरा दीवाना है दीवाना है दीवाना है,

मेरे साईं से मिला दो उनका दीदार करा दो,

वास्ता तुमको खुदा का मेरी चाहत का वफा का,

तेरी चाहत ने किया दुनिया से बेगाना है,

तेरा दीवाना है दीवाना है दीवाना है,

तेरी चाहत की कसम है तुही बस मेरा सनम है,

अपनी हस्ती को मिटा दू तुझपे ये जान लुटा दू,

तेरे दर पे ही मुझे आज तो मर जाना है,

तेरा दीवाना है दीवाना है दीवाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।