हम कब से है साई तुझपे फ़िदा

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॥ पावन पाठ ॥

हम कब से है साई तुझपे फ़िदा कुछ याद नहीं कुछ याद नहीं,

ये शायद जन्मो का रिश्ता कुछ याद नहीं,

हम कब से है साई तुझपे फ़िदा......

अब चारो और है उजारा एक दीप जला कर बैठे है,

हम निकल गए अंद्यारो से एक राह पे आकर बैठे है,

कब छूटा मन का दौरा कुछ याद नहीं कुछ याद नहीं,

हम कब से है साई तुझपे फ़िदा....

हम ने पाया रेहमत का धन,

जबसे तन मन है साथ तेरे,

अब तू है हमारा रखवाला अब हम पे सदा है हाथ तेरे,

अब हर पग हर पल तेरे सिवा कुछ याद नई कुछ याद नहीं,

हम कब से है साई तुझपे फ़िदा...

तू ही जाने तेरी दुनिया में जय सच्चा है क्या झूठा है,

पर तेरी इज्जत पे हमने तेरा ही खजाना लुटा है,

किस वक़्त खुला तेरा दरवाजा कुछ याद नहीं कुछ याद नहीं,

हम कब से है साई तुझपे फ़िदा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।