मेरी नैया फसी मजधार

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॥ पावन पाठ ॥

सबकी बिगड़ी तू ही बनाये बिगड़ी मेरी बना दो न,

ओ शिरडी के साई बाबा एक झलक दिखा दो न,

बिगड़ी मेरी बना दो न एक झलक दिखा दो न,

मेरी नैया फसी मजधार ओ बाबा करदो न करदो बेडा पार,

एहम नजर कर सतगुरु साई तुझपे आस लगी मेरी,

द्वार तेरे बैठी सर नाइ मैं भी दासी बनी तेरी,

तेरे चरण में गिर पड़ी हु सिर पे हाथ फिर दो न,

पलके बिता इस दुःख आरी को सीने से लगा लो न,

सिर पे हाथ फिरदो न सीने से लगा लो न,

मेरी नैया फसी मजधार ..........

ओ मेरे राजा साई बाबा दर से न खाली मैं जाऊ,

पूरी करो मन की अभिलाषा सदा तेरी महिमा गाउ,

दुनिया ने ठुकराया मुझे अब शरण में तेरी आई हु,

मुझपर भी करो करिश्मा मैं दामन फैलाई हु,

तेरी शरण में आई हु मैं दामन फैलाई हु,

मेरी नैया फसी मजधार ओ बाबा करदो न करदो बेडा पार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।